13 Jun 2026, Sat

विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर बड़ी कार्रवाई, छत्तीसगढ़ के 20 नाबालिग बच्चों का किया गया रेस्क्यू

आरजू अंसारी

रायपुर/ विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर 20 नाबालिग बच्चों को बाल श्रम और संभावित शोषण से मुक्त कराया गया।

इनमें रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से 9, बिलासपुर में आरपीएफ की मदद से 7 और रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों का रेस्क्यू किया गया।आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में रायपुर के उरला स्थित एक लोहे की फैक्ट्री में औचक निरीक्षण किया गया।

जांच के दौरान फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने का मामला सामने आया। मौके से 9 बच्चों को संरक्षण में लेकर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की गई और उन्हें बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया।

प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली और पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें बिहार के एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था। मामले में संबंधित ठेकेदार और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही संभावित बाल तस्करी के पहलुओं को भी गंभीरता से खंगाला जा रहा है। बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

प्रकरण में बच्चों के साथ क्रूरता, शोषण और अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 और 143 के तहत कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा बाल श्रम और बाल तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी जांच जारी है।

आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम और बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध आयोग पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अभियान में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम और अन्य अधिकारियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को संरक्षण, परामर्श, चिकित्सकीय सहायता और पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

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