13 Jun 2026, Sat

आरजू अंसारी

रायपुर / नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में छत्तीसगढ़ के तीन वीर जवानों को देश के प्रतिष्ठित वीरता सम्मान ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कांकेर जिले में पदस्थ पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण केवट, पुलिस निरीक्षक रामेश्वर देशमुख तथा बालोद जिले के निवासी और असम राइफल्स में पदस्थ जवान भोजराम साहू को उनके अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र सेवा के लिए यह सम्मान प्रदान किया। इस उपलब्धि से पूरे छत्तीसगढ़ में गर्व और उत्साह का माहौल है।

छत्तीसगढ़ लंबे समय से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे कठिन हालात में पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण केवट और रामेश्वर देशमुख ने नक्सल विरोधी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए कई बड़ी सफलताएं हासिल की हैं। दोनों अधिकारियों ने अपनी बहादुरी, सूझबूझ और नेतृत्व क्षमता के दम पर सुरक्षा बलों को सफलता दिलाई और नक्सलियों के कई मंसूबों को विफल किया। कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने साहस का परिचय देते हुए अभियानों का सफल संचालन किया, जिसके लिए उन्हें देश के सर्वोच्च वीरता सम्मानों में से एक शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया।

पुलिस विभाग में लक्ष्मण केवट और रामेश्वर देशमुख को नक्सल विरोधी अभियानों के विशेषज्ञ अधिकारियों के रूप में जाना जाता है। जानकारी के अनुसार, लक्ष्मण केवट अब तक 97 नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए सफल अभियानों का हिस्सा रहे हैं, जबकि रामेश्वर देशमुख 56 नक्सलियों के विरुद्ध हुई कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। दोनों अधिकारियों ने अपनी रणनीतिक क्षमता और साहस के बल पर सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने में अहम योगदान दिया है।

वहीं बालोद जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी के ग्राम ढोरठिमा निवासी भोजराम साहू ने भी अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। वर्तमान में असम राइफल्स में पदस्थ भोजराम साहू 15 नवंबर 2024 को मणिपुर के टेंगनोपाल क्षेत्र में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए एक विशेष अभियान का हिस्सा थे। आतंकियों की घुसपैठ की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सुबह करीब 9:30 बजे आतंकियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ शुरू हो गई।

इस दौरान भोजराम साहू को गोली भी लगी, लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। घायल होने के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाले रखा और लगातार जवाबी फायरिंग करते रहे। उनकी बहादुरी और दृढ़ संकल्प के चलते आतंकियों को पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। इस कार्रवाई में तीन आतंकवादी मारे गए थे।

भोजराम साहू की वीरता ने यह साबित कर दिया कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित जवान किसी भी परिस्थिति में अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटते। उनकी बहादुरी और राष्ट्र के प्रति समर्पण को देखते हुए उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके साहस, कर्तव्यनिष्ठा और देशभक्ति का प्रतीक है।

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