आरजू अंसारी
रायपुर/ प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने छत्तीसगढ़ के लाखों रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के जीवन में बदलाव लाया है। योजना के तहत राज्य में अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर्स को 256.94 करोड़ रुपये से अधिक की ऋण सहायता प्रदान की जा चुकी है। इससे छोटे कारोबारियों को आर्थिक मजबूती मिलने के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है।
कोविड-19 महामारी के दौरान प्रभावित हुए स्ट्रीट वेंडर्स को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को पीएम स्वनिधि योजना शुरू की थी। योजना के तहत बिना किसी गारंटी के कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे पथ विक्रेता अपना व्यवसाय फिर से शुरू करने या उसका विस्तार करने में सक्षम हो सकें।
योजना के अंतर्गत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण दिया जाता है। पहले चरण में 10 हजार रुपये, दूसरे चरण में 20 हजार रुपये और तीसरे चरण में 50 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण के लिए पात्रता मिलती है।
इस योजना का लाभ सब्जी और फल विक्रेताओं, चाय-नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेताओं, पान दुकानदारों, कपड़ा विक्रेताओं, जूता-चप्पल विक्रेताओं, स्टेशनरी व्यवसायियों, फूल विक्रेताओं, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेताओं सहित नाई, मोची और लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारियों को मिल रहा है।
राज्य में दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी सहित कई जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को योजना का लाभ मिला है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का प्रभावी माध्यम भी है। योजना से स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और उनकी आय में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि यह योजना मेहनतकश पथ विक्रेताओं को आर्थिक संबल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
