रायपुर/ बहुचर्चित छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। ईडी और ईओडब्ल्यू से जुड़े मामलों में सुनवाई के बाद कोर्ट ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। लगभग 168 दिनों तक जेल में रहने के बाद अब चैतन्य बघेल के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 26 दिसंबर को कोर्ट में करीब 29 हजार 800 से अधिक पन्नों का अंतिम चालान पेश किया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कुल 82 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि चालान में घोटाले से जुड़े लेनदेन, लाभार्थियों और साजिश से संबंधित विस्तृत तथ्य शामिल हैं।
ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई को उनके जन्मदिन के दिन भिलाई स्थित निवास से धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया था। शराब घोटाले की जांच एसीबी/ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि घोटाले के कारण राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई लाभार्थियों तक पहुंचाई गई।
छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ईडी लगातार जांच कर रही है। एजेंसी के अनुसार एसीबी में दर्ज एफआईआर में 3,200 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का उल्लेख है। इस मामले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी और कारोबारी सहित कई लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में यह भी सामने आया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी एपी त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के कथित सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया।
अब तक इस मामले में कई बड़े नामों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, चैतन्य बघेल, पूर्व आईएएस अधिकारी अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर और सौम्य चौरसिया शामिल हैं। इसके अलावा आबकारी विभाग के 28 अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। जांच एजेंसियों के अनुसार मामले की सुनवाई और आगे की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।
