अंबिकापुर/ केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में अंबिकापुर के कुछ निजी अस्पतालों द्वारा कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। जांच के दौरान यह खुलासा हुआ है कि कुछ अस्पतालों ने मरीजों को केवल कागजों में भर्ती दिखाकर उनके नाम पर इलाज का दावा प्रस्तुत किया और सरकार से लाखों रुपये का क्लेम प्राप्त किया। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिलने के बावजूद अब तक किसी भी अस्पताल के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से पूरे मामले पर सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी की टीम ने हाल ही में अंबिकापुर के कुछ निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान केडी अस्पताल में रिकॉर्ड के अनुसार आयुष्मान योजना के तहत 29 मरीज भर्ती दर्शाए गए थे, लेकिन जब अधिकारियों ने मौके पर भौतिक सत्यापन किया तो अस्पताल में केवल 20 मरीज ही मौजूद मिले। नौ मरीजों के नहीं मिलने पर अधिकारियों ने अस्पताल प्रबंधन से स्पष्टीकरण मांगा।
नोटिस के जवाब में अस्पताल प्रबंधन ने दावा किया कि शेष नौ मरीज आईसीयू में भर्ती थे। हालांकि, जांच के दौरान आईसीयू में भर्ती मरीजों की जानकारी टीम को तत्काल उपलब्ध नहीं कराई गई थी। ऐसे में इस स्पष्टीकरण पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस घटना ने रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति के बीच अंतर को लेकर कई संदेह पैदा कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मामलों में मरीजों को वास्तविक रूप से भर्ती किए बिना ही उनके नाम पर इलाज का क्लेम किया गया। आरोप है कि ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के आयुष्मान कार्ड का उपयोग कर विभिन्न बीमारियों के नाम पर सरकारी राशि का दावा किया जाता रहा है। यदि जांच में ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी स्वास्थ्य योजना के दुरुपयोग का गंभीर मामला माना जाएगा।
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बावजूद संबंधित अस्पतालों पर अब तक कोई कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसके बजाय अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया और जवाब मिलने के बाद मामला आगे नहीं बढ़ा। इसे लेकर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
आयुष्मान भारत योजना के नोडल अधिकारी डॉ. राजेश भाजगावली ने बताया कि मां महामाया अस्पताल, केडी अस्पताल सहित अंबिकापुर के कुल पांच निजी अस्पतालों में जांच के दौरान अनियमितताएं सामने आई थीं। सभी अस्पतालों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया था। हालांकि, अधिकारियों द्वारा जवाब को संतोषजनक मान लेने के बाद अब तक किसी अस्पताल पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं हुई है।
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि अंबिकापुर में लगातार नए निजी अस्पताल खुल रहे हैं और यदि समय रहते निगरानी और सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो आयुष्मान भारत जैसी महत्वाकांक्षी योजना का दुरुपयोग बढ़ सकता है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल यह मामला जांच के दायरे में है। यदि आगे की जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो संबंधित अस्पतालों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
