रायपुर/ छत्तीसगढ़ के विख्यात हास्य कवि एवं व्यंग्यकार पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे का आज दोपहर रायपुर के ACI अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने दोपहर करीब 4:00 से 4:30 बजे के बीच अंतिम सांस ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनकी मृत्यु हृदयगति रुकने (हार्ट अटैक) से हुई।
डॉ. दुबे का जन्म 8 जनवरी 1953 को बेमेतरा (तत्कालीन दुर्ग ज़िला) में हुआ था। मूल रूप से एक आयुर्वेदिक चिकित्सक होते हुए भी उन्होंने हास्य और व्यंग्य के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बनाई। उन्होंने देश–विदेश में मंचों पर छत्तीसगढ़ी हास्य साहित्य को नई ऊँचाई दी। वर्ष 2010 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था। इससे पूर्व 2008 में उन्हें ‘हास्य रत्न’ पुरस्कार भी मिला था।
डॉ. दुबे ने पाँच पुस्तकें लिखीं और दूरदर्शन समेत कई टेलीविजन कार्यक्रमों में शिरकत की। वे छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति के सशक्त प्रतिनिधि माने जाते थे। उनकी हास्य शैली में सामाजिक व्यंग्य और चुटीले तर्क होते थे, जो हर वर्ग के लोगों को हँसी में डुबो देते थे।
उनके निधन की खबर से साहित्यिक जगत, राजनीतिक हलकों और प्रशंसकों में गहरा शोक है। सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया है। मुख्यमंत्री समेत कई केंद्रीय व राज्य स्तरीय नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें युगपुरुष बताया।
डॉ. दुबे न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश भर के साहित्य प्रेमियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे। हास्य और व्यंग्य के क्षेत्र में उनका योगदान हमेशा प्रेरणास्त्रोत बना रहेगा।
