30 May 2026, Sat

दो सूत्रीय मांगों को लेकर सेजेस संविदा शिक्षक व कर्मियों का समर्थन

कोरिया/ स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में कार्यरत संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों ने गत रविवार 20 जुलाई को 28 जिलों में एक दिवसीय सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया उक्त प्रदर्शन छत्तीसगढ़ स्वामी आत्मानंद संविदा शिक्षक व कर्मचारी संघ के बैनर तले हुआ।

आपको बता दें प्रदर्शनकारी संविदा शिक्षकों सहित कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। इसी तारतम्यता में कोरिया जिले के शिक्षक एवं कर्मचारी संघ के अध्यक्ष गोपाल दत्त उर्मलिया ने कहा कि कोरिया जिले के सभी सेजेस प्रदेश स्तरीय आह्वाहन का समर्थन करता है साथ ही हमें शासन से पूरी उम्मीद है कि शासन हमारे हित में कार्य करेगी और हमारे दो सूत्रीय मांगों को पूरा करेगी।

विभिन्न जिलों में धरना संघ के प्रदेश अध्यक्ष दुर्योधन यादव के मार्गदर्शन में हुआ। दो प्रमुख मांग नियमित वेतन वृद्धि और वेतनमान निर्धारण की है। शिक्षकों ने कहा वे कई वर्षों से पूर्णकालिक सेवा दे रहे हैं।

इसके बावजूद उन्हें वेतनमान नहीं मिला। न ही कोई वार्षिक वेतनवृद्धि तय की गई है। दूसरी मांग शिक्षा विभाग में समावेशन और नियमितीकरण की है।

संघ ने कहा कि पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान सांसद बृजमोहन अग्रवाल भी इस मांग को सार्वजनिक रूप से स्वीकार कर चुके हैं। संघ ने मांग की कि सभी संविदा शिक्षकों और कर्मचारियों को शिक्षा विभाग में समाहित कर नियमित किया जाए। इससे उन्हें सेवा सुरक्षा मिलेगी और वे बिना भय के शिक्षा गुणवत्ता में योगदान दे सकेंगे!

प्रदेशभर में 14 हजार संविदा शिक्षक हैं:–

प्रदेश के आत्मानंद स्कूलों में लगभग 13 से 14 हजार संविदा शिक्षक कार्यरत हैं। जबकि इनकी तुलना में नियमित कर्मचारियों को हर पद पर 10 से 15 हजार रुपए अधिक वेतन मिलता है।

वर्ष 2020 से स्कूलों में दे रहे हैं अपनी सेवाएं:–

संविदा शिक्षक व कर्मचारी 2020 से ही स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वर्तमान में कई जिलों के स्कूलों में मानदेय समय पर नहीं मिल पाता। इससे आर्थिक रूप से समस्या होती है। शिक्षकों व कर्मचारियों ने सीमित संसाधनों के बावजूद उत्कृष्ट शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्य संपादित किए हैं। स्कूलों को राज्य के अग्रणी शिक्षण संस्थानों में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनकी मांगों को पूरा करेगी।

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