30 May 2026, Sat

ग्राम पंचायत मझगवां में उचित मूल्य दुकान संचालन पर विवाद, ग्रामीणों ने की संचालक बदलने की मांग

कोरिया/ मझगवां पंचायत में शासकीय उचित मूल्य दुकान के संचालन को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों ने वर्तमान संचालक धनेश्वरी राजवाड़े पर गंभीर आरोप लगाते हुए दुकान का आवंटन रद्द करने और किसी अन्य समूह को जिम्मेदारी सौंपने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि धनेश्वरी राजवाड़े वर्तमान में दो पंचायतों में खाद्यान्न वितरण करती हैं, लेकिन उनका वितरण का समय तय नहीं होता। उनके द्वारा पहले ही राशन कार्ड जमा करवाकर बिना खाद्य सामग्री दिए कार्ड में एंट्री कर दी जाती है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनके कार्ड और परिवार के कार्ड में बिना चना दिए एंट्री कर दी गई।

30 जून 2025 को इस संबंध में शिकायत करने पर संचालक द्वारा बदसलूकी और अभद्र व्यवहार किया गया, जिसकी पुष्टि वहां मौजूद ग्रामीणों ने की।

पूर्व में भी इनके खिलाफ खाद्यान्न शाखा में कई शिकायतें दर्ज हैं। आरोप है कि रात में मिट्टी तेल वितरण के दौरान ग्रामीणों ने इन्हें रंगे हाथों पकड़ा, जिसकी तस्वीरें और खबरें सोशल मीडिया व अखबारों में आईं। बावजूद इसके अब तक कार्रवाई नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, जो भी इनके खिलाफ शिकायत करता है, उसे राशन कार्ड कटवाने की धमकी दी जाती है और डर का माहौल बनाया जाता है।

13 जुलाई 2025 को खाद्यान्न अधिकारी द्वारा मझगवां उचित मूल्य दुकान का निरीक्षण किया गया और पंचनामा तैयार किया गया, जो संचालक के खिलाफ पाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि संचालक मझगवां या मंडलपारा की निवासी भी नहीं हैं, फिर भी उन्हें दो दुकानें आवंटित हैं।

आरोप यह भी है कि समूह के नाम पर दुकान चलाई जा रही है, लेकिन समूह में किसी अन्य सदस्य की भागीदारी नहीं है, और पूरा संचालन एक ही व्यक्ति करती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि महिलाओं के उत्थान के लिए बनाए गए समूह का दुरुपयोग रोकते हुए, इस समूह का आवंटन तत्काल रद्द किया जाए और ग्राम पंचायत के किसी अन्य पात्र समूह को दुकान संचालन की जिम्मेदारी दी जाए।

परिवार के बारे में शिकायतकर्ता का कहना है कि उनका कोई सदस्य सरकारी या संविदा नौकरी में नहीं है, उनके पिताजी एसईसीएल से 2016 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं और पूरा परिवार कृषि पर आधारित है। उन्होंने दावा किया कि उनके या परिवार के किसी भी सदस्य द्वारा संचालक के साथ कोई अभद्र व्यवहार नहीं किया गया, और उनकी सभी शिकायतें ग्रामीणों के समक्ष की गई हैं, जिनके साक्ष्य भी मौजूद हैं।

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