30 May 2026, Sat

तमनार कोयला खदान विवाद ने पकड़ा राजनीतिक तूल, ग्रामीण-पुलिस झड़प पर कांग्रेस-भाजपा आमने-सामने

रायपुर/ रायगढ़ जिले के तमनार में कोयला खदान खोले जाने के मुद्दे को लेकर आंदोलनरत ग्रामीणों और पुलिस के बीच हुई हिंसक झड़प ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। कांग्रेस जहां जिला प्रशासन को इसके लिए जिम्मेदार ठहरा रही है, वहीं सरकार की ओर से मामले की जांच कराने की बात कही जा रही है।

तमनार दौरे से लौटने के बाद छत्तीसगढ़ कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने पूर्व मंत्री शिव डहरिया और कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। दीपक बैज ने कहा कि तमनार की घटना भाजपा की गांव, गरीब, किसान और आदिवासी विरोधी नीति का परिणाम है। उन्होंने कहा कि 27 दिसंबर की घटना के लिए सीधे तौर पर जिला प्रशासन जिम्मेदार है। आंदोलनकारियों को साजिश के तहत कुचलने की रणनीति बनाई गई, ग्रामीणों को उकसाया गया और कलेक्टर-एसपी के कैंप में रहने के बावजूद किसी अधिकारी ने धरनारत ग्रामीणों से संवाद नहीं किया।

दीपक बैज ने बताया कि रायगढ़ के तमनार में जिंदल पावर कंपनी को कोल माइंस अलॉट किया गया था, जिसकी जनसुनवाई 8 दिसंबर को हुई। इससे पहले 5 दिसंबर से किसान और आदिवासी जनसुनवाई स्थगित करने की मांग को लेकर धरने पर बैठे थे। जनसुनवाई के दिन 14 गांवों के करीब 10 हजार से अधिक लोगों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने स्थल से दूर एक कोने में टेबल लगाकर चुपके से जनसुनवाई कर ली।

उन्होंने आरोप लगाया कि जनसुनवाई में कोल कंपनी के कर्मचारियों से फर्जी हस्ताक्षर कराए गए। इसके विरोध में ग्रामीणों ने धरना दिया, जिसका कांग्रेस ने समर्थन किया। बैज ने सवाल उठाया कि चोरी-छिपे जनसुनवाई क्यों कराई गई और यदि ग्रामीण धरने पर थे तो प्रशासन ने उनसे संवाद क्यों नहीं किया।

27 दिसंबर की घटना को लेकर उन्होंने कहा कि भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच जिंदल कंपनी की कोयले से भरी गाड़ियां रवाना की जा रही थीं, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हो गए। इस दौरान 40 लोगों की गिरफ्तारियां हुईं, महिलाओं के साथ अभद्रता हुई, आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया और लोगों को प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद स्थिति बेकाबू हो गई।

पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने भी जनसुनवाई को फर्जी बताते हुए कहा कि 14 गांवों के ग्रामीणों ने इसका विरोध किया था और कोल कंपनी के कर्मचारियों से जबरन हस्ताक्षर कराए गए। उन्होंने पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की।

वहीं तमनार मामले पर डिप्टी मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर कार्रवाई होगी। दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री अरुण सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार और प्रदेश के विकास को संतुलित रूप से देखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास रेवेन्यू नहीं आएगा तो विकास कैसे होगा, इस पूरे मुद्दे को व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।

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