30 May 2026, Sat

दूरस्थ आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधा की बड़ी पहल, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिटों को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना

रायपुर/ दूरस्थ और घने वनांचल वाले आदिवासी क्षेत्रों में अब स्वास्थ्य सेवाएं सीधे लोगों के घरों तक पहुंचेंगी। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम जनमन” के तहत नवा रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल सहित मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि और विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

मोबाइल मेडिकल यूनिटों के संचालन से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) तक नियमित स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने की तैयारी पूरी हो गई है। सरकार का मानना है कि दुर्गम अंचलों में रहने वाले समुदायों को अस्पताल तक पहुंचने में आने वाली कठिनाइयों को देखते हुए यह व्यवस्था स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधे उनके गांवों व बसाहटों तक पहुंचाएगी। इन यूनिटों के माध्यम से प्रदेश के 18 जिलों के 2100 से अधिक गांवों और बसाहटों में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं दी जाएंगी, जिससे दो लाख से अधिक पीवीटीजी आबादी को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए अब इलाज और जांच की सुविधा गांव में ही उपलब्ध होगी। उन्होंने इसे आदिवासी समुदायों की सर्वांगीण भागीदारी और स्वास्थ्य सुरक्षा का ठोस आधार बताया। साय ने यह भी बताया कि प्रदेश में 3 करोड़ की आबादी में विशेष पिछड़ी जनजाति के 2 लाख 30 हजार लोग 18 जिलों के 2100 बसाहटों में निवासरत हैं और ये मोबाइल मेडिकल यूनिट उनके लिए वरदान साबित होंगे। इन यूनिटों में डॉक्टर, नर्स, लैब टेक्निशियन और स्थानीय वालंटियर तैनात होंगे, साथ ही 25 तरह की जांच और 106 तरह की दवाइयां निःशुल्क उपलब्ध होंगी।

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि यह पहल विशेष पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री साय के प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि मोबाइल मेडिकल यूनिट ऐसे दुर्गम वनांचलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करेगी, जहां पहले सुविधाएं सीमित थीं।

स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने बताया कि पीएम जनमन योजना 15 नवंबर 2023 को विशेष पिछड़ी जनजातियों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए शुरू की गई थी। प्रत्येक मोबाइल मेडिकल यूनिट में चिकित्सक, नर्स, लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट और स्थानीय स्वास्थ्य स्वयंसेवक तैनात होंगे। ये यूनिट हर 15 दिन में स्वास्थ्य शिविर आयोजित करेंगी, जिनमें 25 से अधिक प्रकार की जांच और रोगों का उपचार किया जाएगा, और आवश्यक दवाइयां वितरित की जाएंगी। गंभीर मरीजों को आवश्यकता अनुसार निकटतम स्वास्थ्य संस्थानों में भेजा जाएगा।

पूर्व में संसाधनों की कमी के कारण दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं नियमित रूप से नहीं पहुंच पाती थीं। अब नए वाहन और प्रशिक्षित कर्मियों के साथ यह व्यवस्था लगातार संचालित की जा सकेगी। इस पहल से टीबी, मलेरिया, एनीमिया और कुपोषण जैसी समस्याओं की समय पर पहचान और रोकथाम में मदद मिलेगी।

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