बैकुंठपुर, कोरिया/ कोरिया जिले के बैकुंठपुर में 17 वर्षीय छात्रा पूजा पैकरा की आत्महत्या का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। मामले को लेकर अब सर्व आदिवासी समाज भी खुलकर पीड़ित परिवार के समर्थन में उतर आया है।
शुक्रवार को पूर्व विधायक एवं सर्व आदिवासी समाज के संरक्षक गुलाब कमरो के नेतृत्व में समाज के पदाधिकारियों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और मामले में त्वरित, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में समाज ने एफआईआर में नामजद सभी आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी, आईसी मार्ट के कथित अवैध निर्माण की निष्पक्ष जांच, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता एवं सुरक्षा उपलब्ध कराने तथा दोषियों को कानून के तहत कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग की। प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से कहा कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ हो और किसी भी दोषी को बचाने का प्रयास नहीं किया जाए।

सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि यह मामला केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के सम्मान और न्याय से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो समाज लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

ज्ञापन सौंपने के दौरान पूर्व विधायक गुलाब कमरो के अलावा सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष विजय सिंह, जिला उपाध्यक्ष रविंद्र सिंह, कंवर समाज के जिलाध्यक्ष मनियार सिंह, आदिवासी कांग्रेस एमसीबी के जिलाध्यक्ष अमोल सिंह, जनपद अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, जिला पंचायत सदस्य सुरेश सिंह, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अशोक जायसवाल, जनपद सदस्य प्रकाश चंद्र पैकरा, डॉ. आर.एस. चंदे, अमर सिंह, जितेंद्र पैकरा, अविनाश पाठक, सुरेश इक्का सहित बड़ी संख्या में समाज के पदाधिकारी एवं विभिन्न संगठनों के सदस्य मौजूद रहे।

गौरतलब है कि बैकुंठपुर निवासी 17 वर्षीय छात्रा पूजा पैकरा अपनी छोटी बहन के साथ खरीदारी करने आईसी मार्ट गई थी। जहां दुकान संचालकों ने उस पर चोरी करने का आरोप लगाया। परिजनों के मुताबिक छात्रा से कथित रूप से लिखित स्वीकारोक्ति (माफीनामा) लिखवाया गया, उसकी स्कूटी जब्त कर ली गई और स्कूटी लौटाने के बदले पैसों की मांग की गई। इस पूरी घटना से छात्रा गहरे मानसिक तनाव में आ गई।

परिजनों का आरोप है कि इसी मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक अपमान के कारण छात्रा ने घर लौटकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

फिलहाल, पूजा पैकरा आत्महत्या मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्याय और जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है। एक ओर पुलिस आरोपियों की तलाश और साक्ष्यों की जांच में जुटी है, वहीं सर्व आदिवासी समाज सहित विभिन्न संगठन जल्द गिरफ्तारी और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच कितनी तेजी और पारदर्शिता से आगे बढ़ती है और पीड़ित परिवार को न्याय कब तक मिल पाता है।
