आरजू अंसारी
बिलासपुर/ छत्तीसगढ़ के स्कूलों में मंत्रोच्चार कराए जाने के राज्य सरकार के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र को मंत्रोच्चार के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यदि कहीं दबाव डालने के साक्ष्य मिलते हैं, तो याचिकाकर्ता दोबारा अदालत का रुख कर सकता है।
यह याचिका छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अब्दुल सलीम रिजवी व अन्य की ओर से दायर की गई थी। याचिका में राज्य सरकार के उस आदेश को संविधान के विरुद्ध बताते हुए निरस्त करने की मांग की गई थी, जिसमें स्कूलों में मंत्रोच्चार शुरू करने की बात कही गई थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि यह आदेश धार्मिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ है।
गुरुवार को जस्टिस ए.के. प्रसाद की एकलपीठ में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य शासन की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल किसी भी स्कूल में मंत्रोच्चार नहीं कराया जा रहा है। साथ ही यदि भविष्य में इसे शुरू किया भी जाता है, तो किसी भी छात्र को इसमें शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। जो छात्र मंत्रोच्चार करना चाहेंगे, वे करेंगे और जो नहीं करना चाहेंगे, उन्हें इसकी स्वतंत्रता होगी।
शासन के इस आश्वासन के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि भविष्य में किसी छात्र पर मंत्रोच्चार के लिए दबाव डाले जाने के प्रमाण सामने आते हैं, तो याचिकाकर्ता साक्ष्यों के साथ नई याचिका दायर करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
